स्वप्न समाधि : निद्रा, चेतना और आत्मशक्ति का रहस्यमयी विज्ञान
निद्रा और स्वप्न का संसार जितना रहस्यमयी है, उतना ही अद्भुत भी। इस संसार में ऐसा कोई प्राणी नहीं जो सोता न हो। चाहे मनुष्य हो, पशु हो या पक्षी — हर जीव अपनी जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा निद्रा में बिताता है। नींद केवल शरीर का विश्राम नहीं, बल्कि चेतना का एक ऐसा द्वार है जहाँ मनुष्य अनेक अनदेखे अनुभवों से गुजरता है। हम रोज़ सोते हैं, लेकिन कभी गहरी और सुखद नींद हमें नई ऊर्जा से भर देती है, तो कभी घंटों सोने के बाद भी थकान बनी रहती है। इसी निद्रा के बीच जन्म लेते हैं स्वप्न — कुछ मधुर, कुछ भयावह, कुछ हमारी अधूरी इच्छाओं से जुड़े हुए और कुछ ऐसे जो भविष्य की झलक जैसे प्रतीत होते हैं। स्वप्न मानव जीवन का एक ऐसा रहस्य हैं जिसे आज तक पूरी तरह समझा नहीं जा सका। कुछ लोग अपने सपनों को स्पष्ट रूप से याद रखते हैं, जबकि कुछ जागने के बाद सब भूल जाते हैं। कई बार ऐसा भी होता है कि कोई सपना बाद में वास्तविकता बनकर सामने आ जाता है। यही कारण है कि प्राचीन काल से ही स्वप्नों को केवल कल्पना नहीं, बल्कि चेतना का संदेश माना गया है। इतिहास गवाह है कि कई महान खोजें स्वप्नों से प्रेरित होकर हुईं। Niels Bohr ने सपने...